जॉर्डन में शुरु हुआ द्वितीय लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन सम्मिट- 2018

यह कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन की है पहल भारत के पूर्व बाल मजदूर रहे युवा जॉर्डन में कर रहें हैं अपनी आवाज बुलंद (अम्मान, मार्च 26 2018)। जॉर्डन के राजा महामहिम अब्दुल्ला द्वीतीय के संरक्षण और राजकुमार अली बिन अल हुसैन की सह-मेजबानी में आज द्वितीय लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन समिट- 2018 का आयोजन जॉर्डन के डेड सागर के किनारे राजा हुसैन बिन तलाल कन्वेंशन सेंटर में शुरु हुआ। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन एक सक्रिय आंदोलन है जो दुनिया भर के नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैश्विक नेताओं और युवाओं को बच्चों के सवाल पर एक साथ लाकर उन्हें प्रेरित करने, सहयोग देने और सबसे कमजोर बच्चों की रक्षा के लिए काम करता है। भारत के युवाओं में अमरलाल, मनन अंसारी, शुभम और खुशबू सम्मेलन में उपस्थित थे। खुशबू को छोड़कर अन्य सभी पूर्व बाल श्रमिक हैं। बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा इन्हें बाल श्रम से मुक्त करा कर शिक्षित किया गया है। एक पूर्व बाल मजदूर से इंजीनियर तक का सफर तय करने वाले शुभम ने इस अवसर पर कहा, "मैंने अपने पूरे जीवन में संघर्ष किया है। एक बच्चे के रूप में मैंने अपनी रोजमर्रा की रोटी के लिए, अपने अस्तित्व के लिए निरंतर संघर्ष किया। आज मैं बच्चों के शोषण के खिलाफ संघर्ष करता हूं और उनके अधिकारों के लिए लड़ता हूं| हां, जॉर्डन के लिए उड़ान, मेरी पहली हवाई उड़ान थी। बहुत आरामदायक और शांतिपूर्ण। लेकिन जैसे ही दुनियाभर में संघर्ष करने वाले बच्चों के विचार मेरे ध्यान में आये, तो अमीरात एयरलाइन्स की सुविधा और आराम से भी मुझे राहत नहीं पहुंची। मैंने अभी तक शांति नहीं पाई है।” कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन इस सम्मिट में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से 200 युवाओं को आमंत्रित किया है, जिनमें मुख्य रूप से पाकिस्तान, फिलिस्तीन, स्वीडन आदि के युवा हैं। इस कार्यक्रम में मोहम्मद अल जुंदे भी शामिल हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार विजेता (2017) हैं। वह एक सीरियाई शरणार्थी हैं और अब स्वीडन में रहते हैं। खिबाएत सालाजार पेरू से आई हैं। वे पेरू में “100 मिलियन फॉर 100 मिलीयन” अभियान के राष्ट्रीय युवा समन्वयक हैं। खिबाएत सलजार कहती हैं, "परिवार के सदस्यों द्वारा बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और स्कूलों में उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। वे दूसरे देशों में प्रवास कर रहे हैं तथा असुरक्षित हैं और बाल श्रम, यौन शोषण और अन्य तरह की हिंसा का सामना कर रहे हैं। मैं इस सम्मेलन का हिस्सा बनकर खुश हूं जो युवा पीढ़ी को वंचित लोगों के लिए कुछ करने की प्रेऱणा देता है।” सम्मिट को संबोधित करते हुए राजकुमार अली बिन अल हुसैन ने कहा, "आज संघर्ष, हिंसा, जलवायु परिवर्तन और गरीबी लाखों बच्चों को स्थान परिवर्तन के लिए मजबूर कर रही है। लाखों लोग अपने घरों और परिवारों को छोड़ कर पलायन कर रहे हैं। ऐसे लोग दुर्व्यापार का शिकार हो रहे हैं, गुलाम बनाये जा रहे हैं। वे औपचारिक शिक्षा से वंचित हो रहे हैं और नियमित रूप से शारीरिक और भावनात्मक दुरुपयोग का शिकार हो रहे हैं। यह सम्मलेन लोगों को एक साथ मिलकर इन चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करने और उन्हें संबोधित करने के लिए दीर्घकालिक और यथार्थवादी रणनीतियों को तैयार करने हेतु एक ईमानदारी भरा ठोस प्रयास है।" पनामा के राष्ट्रपति एच.ई. जुआन कार्लोस वरेला रॉड्रिग्ज़ ने बच्चों के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर करते हुए कहा, “राज्य के प्रमुख और नेता के रूप में मैं अपने देश के हर बच्चे को यह गारंटी देने के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध हूं कि उचित अवसरों और एक ऐसे वातावरण तक उसकी पहुंच हो जो किसी भी प्रकार के शोषण, दुरुपयोग, हिंसा और भेदभाव से मुक्त हो।” लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन सम्मिट का उद्देश्य दुनिया के प्रभावशाली नेताओं को बाल हिंसा के खिलाफ एकजुट करना है। ताकि हर बच्चे को सुरक्षा दी जा सके और उसे शिक्षित किया जा सके। आज भी 263 लाख से अधिक बच्चे और युवा स्कूल से बाहर हैं। 152 लाख बच्चे बाल श्रमिक हैं और 12 लाख बच्चे जो दुनिया का आधा हिस्सा हैं, शरणार्थी हैं और आश्रय की तलाश में हैं। यह केवल आंकड़े भर नहीं हैं। बल्कि, प्रत्येक आंकड़ा खोये हुये बचपन का प्रतिनिधित्व करता है। ये पीडित बच्चे मानसिक आघात में हैं। शोषित होने के कारण पीड़ित और असुरक्षित हैं, जिससे मानवता सबसे बड़े संकट का सामना करेगी। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा, "मैं एक ऐसी दुनिया का सपना देखता हूं, जहां किसी बच्चे को पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं हो। यदि प्रौद्योगिकी, ज्ञान और धन बिना आश्रय या शरण की मांग के सीमा पार स्वतंत्र रूप से जा सकता है तो हमारे बच्चे क्यों नहीं? मैं एक ऐसी दुनिया का सपना देखता हूं, जहां हर सीमा, खजाना और दिल सभी बच्चों के लिए खुले हों। मैं एक ऐसी दुनिया का सपना देखता हूं जहां बचपन का सार- “सादगी, शुद्धता और माफी”- प्रत्येक की रोजमर्रा की ज़िंदगी की ताकत बन जाती है।” दिसंबर 2016 में आयोजित प्रथम लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन सम्मिट भारत के राष्ट्रपति माननीय श्री प्रणव मुखर्जी द्वारा आयोजित किया गया था। जिसमें 21 नोबेल पुरस्कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं ने शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन, सरकार और नागरिक समाज के 400 प्रतिष्ठित विचारकों और प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर दुनिया के बच्चों को प्राथमिकता देने हेतु मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दिखाई थी। भारत में पहले सम्मेलन में भाग लेने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव होजे अंजेल गुरिया ने अपना अनुभव साझा किया कि ओईसीडी बच्चों के कल्याण को अपने उपायों, समावेशी विकास के संकेतकों और जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल कर रहा है। इसे दुनिया की सरकारों का समर्थन प्राप्त करने के लिए लॉरियेट्स और लीडर्स फॉर चिल्ड्रन सम्मिट बुलाया गया है, जिससे दासता को खत्म करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को दोहराया जा सके तथा सभी बच्चों के लिए शिक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। लॉरियेट्स और लीडर्स फॉर चिल्ड्रन को आयोजित करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और तिमोर लेस्ते के पूर्व राष्ट्रपति जोस रामोस होता के नेतृत्व में एक स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया गया है। जिसमें जॉर्डन के राजकुमार अली बिन हुसैन, महामहिम पनामा की प्रथम महिला श्रीमती लोरेना कैस्टिलो डी वेरेला, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और रॉबर्ट एफ केनेडी मानवाधिकार संगठन की अध्यक्ष सुश्री केरी कैनेडी और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और सतत विकास लक्ष्यों पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष सलाहकार प्रोफेसर जेफरी सैक्स शामिल हैं।
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